मेरा काव्य

बुधवार, 18 मई 2016

एक चिड़िया थी



एक  चिड़िया थी ,
उसका  घोसला था ,
घोंसले में अंडा था ,
चिड़िया जब भी घोसले में होती थी
उस बाज से बेखबर हो कर जो चिड़िया और अंडे पर
एकाएक झपट्टा मारने की जुगाड़ में था
अंडे को सेती थी/                                                                                             पूर्वाभ्यास

एक चिड़िया थी ,
उसका एक घोंसला था ,
घोसले में  बच्चा था
चिड़िया बच्चे के लिए दाना  लाती थी
उस गिद्ध से बेखबर हो कर
जो अपने खौफनाक पंजों के निर्मम प्रहार से
चिड़िया , बच्चे और घोसले का अस्तित्व मिटा देना चाहता था
अपनी चोंच से बच्चे को पानी पिलाती थी /

चिड़िया निरीह थी ,
बच्चा कमजोर था
निर्जीव घोसला था
इसीलिए बाज और गिद्ध ने मिल कर खुद ही कर लिया फैसला था
क्यूंकि अब वहां न चिड़िया है
न घोसला है और न बच्चा है /

तो क्या कहानी यही पर ख़त्म हो जाएगी
और चिड़िया घोसले,  बच्चे ,गिद्ध , बाज
की कहानी की क्या पुनरावृत्ति नहीं हो सकती है /
भाईजी क्या आप को इस का आभास है
की चिड़िया बच्चे और घोसले पर हमला
वास्तव में पूर्वाभ्यास है







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