अपने लालच के हाथों से
मार कर विछाई गयी
विश्वास की लाश को
आस्था का कफ़न पहना कर
स्वार्थों की टिकटी पर बाँधने के बाद
आइये हम परमार्थ की बातें करें /
सुनतें हैं कि प्रजा का
प्रजातंत्र से बहुत घना रिश्ता है
जो पहले सुख देता होगा
अब नासूर की तरह रिसता है
तो आइये
पड़ोसी की पकी खड़ी फसल को पूरी श्रद्धा से
एक चिंगारी समर्पित करने के बाद
हम एकता की बातें करें
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